बिहार में गुपचुप NRC? ओवैसी ने चुनाव आयोग पर लगाया सनसनीखेज़ आरोप

अजमल शाह
अजमल शाह

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बिहार में “गुप्त तौर पर” एनआरसी (NRC) जैसी प्रक्रिया लागू कर रहा है। वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए अब जनता को अपने और अपने माता-पिता के जन्म की तारीख़ और जगह के सबूत देने होंगे। मतलब अब आप सिर्फ भारतीय होने से वोटर नहीं बन सकते, आपको जन्मपत्री के साथ खगोल-गणित भी लाना पड़ेगा!

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डॉक्यूमेंट नहीं? तो लोकतंत्र में एंट्री भी नहीं!

ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी कागज़ों में इतनी ग़लतियाँ हैं कि लोग अपने ही जन्म को साबित नहीं कर पाएंगे – “कहीं वोटर लिस्ट से ज़्यादा नाम राशन कार्ड में होंगे, तो कहीं आधार में गलत जन्मतिथि!”

यह कदम सीधे तौर पर बिहार के लाखों ग़रीबों को मतदान प्रक्रिया से बाहर कर सकता है। “मतलब, वोट डालो नहीं – सिर्फ झेलो!”

दस्तक या ‘घर-घर जांच’?

ओवैसी ने दावा किया कि चुनाव आयोग एक महीने में पूरे बिहार में घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करना चाहता है।
अब बिहार के गाँवों में, जहाँ मोबाइल सिग्नल तक ढूंढने में GPS थक जाए – वहाँ एक महीना में डाटा कलेक्शन? यह कोई रियलिटी शो है क्या – ‘Kaun Banega Voter?’

इससे भरोसा नहीं, भूचाल आएगा- ओवैसी का बयान

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों से आम जनता का चुनाव आयोग पर भरोसा डगमगाएगा।
मतलब, वोट मांगने आएंगे नेता – और जनता पूछेगी: “पहले बताओ, मम्मी कहाँ पैदा हुई थीं?”

कागज़ दिखाओ, नहीं तो वोट भूल जाओ!

अगर वोट डालना अब डॉक्यूमेंटेशन पर आधारित हो गया, तो लोकतंत्र के मायने बदलते दिख रहे हैं। कहीं यह ‘डिजिटल इंडिया’ नहीं, ‘डिजिटल अड़चन’ तो नहीं?

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